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वैश्विक आतंकवाद का एक और भयानक चेहरा

श्रीलंका में 21 अप्रेल को ईस्टर रविवार वाले दिन पूजा के दौरान चर्चों और होटलों में हुए बम धमाकों द्वारा हुए घिनौने नरसंहार ने एक बार फिर से सारी मानवता को झकझोड़ कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि इस जघन्य आतंकी हमले में सरकारी प्रवक्ता के अनुसार 300 के लगभग लोग मारे गये हैं और 500 अन्य लोग ज़ख़्मी हुए हैं। ये आँकड़े अभी अपुष्ट है। मारे गये लोगों मे 35 विदेशी नागरिक भी हैं।इस घटना की सारे विश्व ने निंदा की है।

👤 Davinder kumar Dhar24 April 2019 9:01 AM GMT
वैश्विक आतंकवाद का एक और भयानक चेहरा
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वैश्विक आतंकवाद का एक और भयानक चेहरा

श्रीलंका में 21 अप्रेल को ईस्टर रविवार वाले दिन पूजा के दौरान चर्चों और होटलों में हुए बम धमाकों द्वारा हुए घिनौने नरसंहार ने एक बार फिर से सारी मानवता को झकझोड़ कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि इस जघन्य आतंकी हमले में सरकारी प्रवक्ता के अनुसार 300 के लगभग लोग मारे गये हैं और 500 अन्य लोग ज़ख़्मी हुए हैं। ये आँकड़े अभी अपुष्ट है। मारे गये लोगों मे 35 विदेशी नागरिक भी हैं।इस घटना की सारे विश्व ने निंदा की है।

श्रीलंका सरकार ने कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया है लेकिन जांच अभी जारी हैं । किसी भी आतंकी संगठन ने इसकी ज़िम्मेवारी अभी नहीं ली है। आरंभिक जांच में एक अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों को इसका ज़िम्मेदार बताया जा रहा है जिसने सुनियोजित तरीके से ये आतंकी हमले करवाए हैं।आतंकी हमला इतना बड़ा है कि सारी मानवता चिंता में है।लगभग सभी आतंकी हमले आत्मघाती बताये जा रहे है।

श्रीलंका की 2.15 करोड की जनसंख्या में सिंहली 74.9%, मुस्लिम 9.7% , रोमन केथोलिक व अन्य ईसाइयों की जनसंख्या 7.4% है। इस आतंकवादी हमले को पिछले बीस वर्ष में सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है।श्रीलंका सरकार को जानकारी दी गई थी।

अब आई एस ने इस आतंकी हमले की ज़िम्मेवारी ली है।

यह आतंकवादी घटना भी न्यूज़ीलैंड की तरह मुख्यत: धार्मिक स्थलों पर हुई जिसकी अभी विस्तृत जांच होनी हैं। माना जा रहा है कि आतंकी आत्मघाती रहे जिन में कुछ ने आठवें धमाके में पुलिस द्वारा एक घर की जांच में अपने आप को बम से मार डाला जिसमें तीन पुलिस कर्मी भी मारे गये।

क्या इस आतंकी घटना का न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च की घटना से कोई संबंध है या नहीं यह बताना फ़िलहाल संभव नहीं है।लेकिन एक बात तो साफ नज़र आ रही है कि श्रीलंका सरकार चेतावनी के बावजूद भी नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं जबकि वहाँ आज तक कितनी आतंकी घटनाएँ होती जा रही है।

ठीक ऐसे ही 15 मार्च को न्यूज़ीलैंड के क्राइस्ट चर्च में ज़ुमा की नमाज़ के दौरान आतंकवाद के नाम पर अलनूर मश्जिद और लिडबुड इस्लामिक सेंटर में हुए आतंकी हमले में 49 लोगों की जान चली गई।न्यूज़ीलैंड जैसे छोटे देश में जिसकी आबादी 47.83 लाख है जिसमें इसाई 44.3% व मुस्लिम समाज के मात्र 1.1% ही लोग हैं ।इस घटना की भी सारे विश्व में निंदा की गई।

एक सिरफिरे आस्ट्रेलिया के 28 वर्षीय युवक ब्रेनटन टैरेंट ने नमाज़ अदा करने के लिए एक्रत्र हुए लोगों पर अंधाधुँध गोलियाँ चला कर 49 लोगों को मौत के घाट उतार दिया और इतने ही ज़ख़्मी हो गये।मृत लोगों में भारतीय भी थे।बांग्लादेश क्रिकेट टीम बाल बाल बच गई।

इस घटना को अंजाम देने वाले युवक की कोई भीआतंकी पृष्ठभूमि नहीं है ।युवक का जन्म अास्ट्रेलिया में हुआ और वह फ़िटनेस ट्रेनर का काम करता रहा। वह विदेश यात्राएँ भी करता रहा।जिन उतर कोरिया भी है।इस युवक ने घटना को अंजाम देने के लिए न्यूज़ीलैंड को शायद इस लिए चुना कि वहाँ अर्ध स्वचालित हथियारों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और लाइसेंस लेना काफी आसान है जबकि आस्ट्रेलिया में एेसा नहीं है।इस घटना के बाद न्यूज़ीलैंड सरकार ने भी अपने क़ानून सख़्त बना दिये हैं।इस घटना के विरोध में तो ट्रर्की न न्यूज़ीलैंड को धमकी भी दे डाली।

सरकार की नज़र कभी भी उस युवक पर नहीं रही। लेकिन इस युवक ने यह जघन्य अपराध करने से पहले पूरी तैयारी कर ली थी। अपने 87 पृष्ठ के मैनिफ़ेस्टो को इस युवक ने अपनी फ़ेसबुक "वाल" पर घटना से पहले डाला जिसमें अपने को श्वेत सर्वोच्चतावादी(White Supremacist) कहा व यह सारा घोषणा पत्र मुस्लिम समुदाय और अप्रवासियों के विरोध में लिखा गया हैं। वह अमरीका के राष्ट्रपति को अपना आदर्श मानता है। घटना को अंजाम देते हुए इसे अपनी फ़ेसबुक पर भी 'लाईव' प्रस्तुत कर दिया । फ़ेसबुक की विश्व भर में निंदा की गई जो वीडियों को जल्दी डीलिट न कर सकी।

क्राईस्टचर्च व पुलवामा की आतंकी घटना में दो मुख्य अंतर देखे जा सकते है।पुलवामा की घटना को इस्लामिक आतंकवादी ने अंजाम दिया जो एक आत्मघाती था व घटना के साथ ही खत्म हो गया। न्यूजीलैंड की घटना में आतंकी एक "दक्षिणपंथी श्वेत अतिवादी आतंकी" था। जो जीवित रहा।


वह घटना को अंजाम देने के बाद चरमपंथ की वकालत करता रहा। वह कहता रहा कि नेलसन मंडेला की तरह वह भी 27 वर्ष जेल में काटेगा।वह जब जज के समक्ष प्रस्तुत किया गया तो मुस्करा रहा था।

अमरिका में वर्ष 2008 और 2017 के बीच में 71% आतंकी संबंधी घटनाएँ दक्षिण पंथी श्वेत सर्वाच्चता चर्मपंथियों ने की है ।इस्लामिक चर्मपंथियों द्वारा की गई घटनाएँ मात्र 26% थीं । वामपंथी अतिवादियों ने 11% घटनाओं को अंजाम दिया ।

आख़िर यह आतंकवाद है क्या ? आतंकवाद क्यों ? इस मुद्दे पर देश विदेश में बराबर चर्चा होती रहती है लेकिन इसे परिभाषित करना इतना आसान नहीं है। अलग अलग बुद्धिजीवियों में कई तरह के मत है।कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि आतंकवाद व्यवस्थित तरीके से हिंसा करके जनसमूहों ने राजनैतिक उद्देश्य की पूर्ति करना।यह अवैध तरीके से हिंसा कर मासूम लोगों को निशाना बनाते हुए राजनैतिक लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास है।यह समुदायों को गल्त तरीके से डरा कर अपनी धार्मिक सर्वोच्चता प्रदर्शित करना भी हो सकता है।

भारत मुख्यत: इस्लामिक व नक्सलियों की हिंसा से काफी प्रभावित है।इसके साथ पूर्वोत्तर विद्रोही भी देश में काफी सक्रिय हैं। अब 'भगवां हिंसा' भी सामने आने लगी है। समस्त विश्व आतंकी हिंसा की चपेट में है और मुक्ति के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे है।


देवेन्द्र धर

शिमला

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